यह कौन जान पाएगा मजबूर हो गए
कोशिश तो हमने लाख छुपाने की की मगर
वो इस तरह मिले हैं कि मशहूर हो गए।
ये उम्र का तकाजा है या हुस्न का कमाल ,
मिलते हैं इस अदा से कि मगरूर हो गए।
ता उम्र साथ रहने की खाई थी जो कसम ,
उसको भुला के किस तरह हम दूर हो गए।
दिल दे रहा हूं आपको रखिए सम्हाल के ,
लौटा के ये न कहिएगा मजबूर हो गए।
जब पास थे तो सामने रहते थे रात दिन,
अब दूर जा के आंख के वो नूर हो गए।
पाया है प्यार करने का कितना बडा सिला,
हम इस तरह मिटे हैं कि मशहूर हो गए।
---- राम प्रकाश गोयल, बरेली (उ. प्र.)
अच्छी लगी ग़ज़ल ...ऐसा लगा पहले भी कहीं पढ़ी है .....!!
जवाब देंहटाएं